सोमवार, 22 दिसंबर 2025

रास्ते सीधे कभी होते नहीं हैं [ नवगीत ]

 761/2025


    


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


रास्ते

सीधे कभी

होते नहीं हैं।


आज तक

जितना चला

सीधा न कोई

कंकड़ों -

पत्थर भरे

इकसार कोई

मोड़ भी

जितने पड़े

सीधे नहीं हैं।


राह में

अपनी बनानी

राह पड़ती

अवरोधकों 

के बिना 

गाड़ी न बढ़ती

हार के बिन

हम कभी

जीते नहीं हैं।


ये न समझो

ली छलाँगें

और आए

चढ़ लिए

सोपान तब

यह शृंग पाए

उलझनों के

दिन कभी

बीते नहीं हैं।


शुभमस्तु !


21.12.2025●1.45प०मा०

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