745/2025
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
बिना पढ़े ही
जीव-जंतु का
भर जाता है पेट।
यूनिवर्सिटी में
कब जाता
कोई गर्दभ मेष
डॉक्टरेट
या मेडीकल की
शिक्षा करे न शेष
फिर भी
मालिक उसे खिलाता
भरे पेट का गेट।
नीयत का है
कुटिल आदमी
उसे चाहिए दाम
सोच रहा
है शांति दाम में
मिलना है आराम
एक राह सब
जाते -आते
भिक्षुक या हो सेट।
काम करे कम
दाम अधिक हो
यही मानवी नीति
नेतागीरी
श्रेष्ठ सभी में
खड़ी
द्रव्य की भीति
बढ़ी हुई है
इसीलिए तो
कमीशनों की रेट।
शुभमस्तु !
17.12.2025 ●1.00प०मा०
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