सोमवार, 22 दिसंबर 2025

कार हमारी सरकारी [ नवगीत ]

 744/2025


           


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


चले 

कमीशन के पहियों पर

कार हमारी सरकारी।


पढ़कर 

बनते डिग्रीधारी

कहीं नौकरी करते

अधिकारी की

वैन चलाते

जी भर हुक्का भरते

बिना पढ़े

सब मिला हमें तो

नहीं बनेंगे दरबारी।


मिले काम के बदले

 हमको

दाम नहीं, भर-भर बोरे

सात नहीं

सत्रह पीढ़ी तक

मौज करें छोरी -छोरे

इधर सुना

वह पार उधर से

भले कहो तुम व्यभिचारी।


सच से 

कोसों दूर रहें हम

आसपास क्या कोई काम?

वैसे तो है 

दाम राम ही

फिर भी जपते सौ-सौ राम

नेता हैं तो

कभी विधायक

मंत्री भी बनते भारी।


शुभमस्तु !


17.12.2025●12.30 प०मा०

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