शुक्रवार, 26 दिसंबर 2025

हो विनम्र अनुरोध [ दोहा ]

 781/2025


    


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


करते   हैं  अनुरोध  हम,सुनिए कृपानिधान।

सबका  दुख हर लीजिए,हमें मूढ़ मति जान।।1

असर बड़ा अनुरोध का,पड़े मनुज जो नेक।

सुनता भाव विनम्र तो,मति में भरे विवेक।।2


काम किसी से चाहते,याचक बन कर दीन।

करें सदा अनुरोध ही,लेश न मेख न मीन।।3

कर मत ऐसा आचरण, लगे उग्र या क्रोध।

सदा करें अनुरोध ही,जगा हृदय में बोध।।4


हृदय द्रवित होता सदा,हो अनुरोध विनम्र।

कटुक  शब्द बोलें  नहीं, यद्यपि कोई  उम्र ।5

अनुरोधी की बात पर,करके पूर्ण विचार।

मनन करें अनुरोध का,बदलें निज व्यवहार।।6


किया राम ने सिंधु से,जब विनम्र अनुरोध।

दिया पंथ तब सिंधु ने,दया भाव का बोध।।7

धृष्ट कभी  करता  नहीं, सदाचरण अनुरोध।

रहे अहं में मग्न वह,देख लिया कर शोध।।8


बिल्ली  चूहे  से  नहीं, करे  सूक्ष्म अनुरोध।

समझे मुँह का ग्रास ही,दिखलाती बस क्रोध।।9

शत्रु शत्रु से क्यों करे, अति विनम्र अनुरोध।

जान रहा कमजोर है,बने उग्र कर क्रोध।।10


महत भाव अनुरोध का,मानव बने महान।

मैल धुले मन का सभी,जाने सकल जहान।।11


शुभमस्तु !


24.12.2025●8.00प०मा०

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