753/2025
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
पौष में भी
बैंड देखो
बज रहे हैं।
ब्याह पहले
पौष में
होते नहीं थे
शुभ मुहूरत
आज जैसे
तब कहीं थे ?
देख लो
दुलहे बराती
सज रहे हैं।
आदमी के पास है
अब
अवधि थोड़ी
व्यर्थ में
खाली खड़ी क्यों
आज घोड़ी
इसलिए
मरजाद अपनी
तज रहे हैं।
पार्लर
खाली पड़े
कोई न आए
पंडितों से
ब्याह कोई
क्यों कराए
इसलिए
प्रभु नाम वे नित
भज रहे हैं।
शुभमस्तु !
20.12.2025●11.00आ०मा०
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