सोमवार, 15 दिसंबर 2025

फल [ चौपाई ]

 737/2025


          


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'



मानव    कौन   मनुज   तन धरता।

फल की नहीं    कामना   करता।।

मन  में  एक   भाव    नित    जागे।

रहे       सुफल    पाने    में   आगे।।


योगीश्वर         श्रीकृष्ण        हमारे।

उपदेशक    गीता     के        न्यारे।।

कर्म   करे फल   तुझे     मिलेगा।

छोड़  कामना     सुमन    खिलेगा।।


जिसने   भू  पर   विटप    लगाया।

बढ़ा  विटप  बहु सुमन  खिलाया।।

परिश्रम का  फल खूब    मिलेगा।

सौरभ   महके    सुमन    खिलेगा।।


चाकू  का  फल   बहु  उपयोगी।

काटे    फल    सब्जी   वह भोगी।।

हिंसक   वार     वही    कर  देता।

प्राण    जीव    के    हर वह लेता।।


मात - पिता     हैं      वृक्ष    हमारे।

जिनके  फल हम   संतति   प्यारे।।

कर्मों  में       अधिकार      तुम्हारा।

वहीं     बहे    गङ्गा      की    धारा।।


पका  हुआ  फल    बीज  बनाता।

पादप    नए  जगत     में    लाता।।

सघन   बाग  फिर     से    लहराए।

महके     कुंज       मधुर  मुस्काए।।


'शुभम्'  कर्म    अधिकार   तुम्हारा।

फल  देते    प्रभु    तुमको   प्यारा।।

फल  से ध्यान   हटा    जो    लेता।

व्यक्ति     वही     है   जग में  चेता।।


शुभमस्तु !


14.12.2025● 8.30 प०मा०

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