सोमवार, 15 दिसंबर 2025

शब्दों के वे बाज़ीगर [ गीत ]

 740/ 2025


   

©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


राजीनीति के

अटल  पुरोधा

शब्दों के वे बाजीगर ।


नया एक

अध्याय लिख दिया

सोया देश जगाने को

अटल बिहारी

बाजपेयी ने

सुस्ती सकल भगाने को

वाणी में तव

ओज उमड़ता

दुःखी बड़े बरबादी पर।


देशप्रेम जो

उमड़ा इतना

माना सब को अपना है

नहीं बसाई

निजी गृहस्थी

भारत के हित तपना है

समय नहीं था

समय लगाते

जो अपनी ही शादी पर।


जिसने सुना

एक भी भाषण

अथवा उनकी कविताई

अनुगामी 

हो गया उन्हीं का

जादू की महिमा छाई

रहे सादगी पूर्ण

सदा ही

नेह बरसता खादी पर।


भाव स्वदेशी का

मन में था

भारत हो अपने पर निर्भर

निर्मित करें

देश में अपना

और किसी पर क्यों जाते मर

चिंतित हुए

घटे जनसंख्या

अलख जगा आबादी पर।


शिक्षित हो

घर-घर की नारी

शिक्षित हर परिवार बने

नारी हो

सशक्त भारत की

रहें विश्व में सदा तने

जय जवान

विज्ञान सदा जय

जय किसान उमड़ी घर-घर।


शुभमस्तु !


15.12.2025 ●4.00प०मा०

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