शुक्रवार, 27 जून 2025

माँजें दाँत दतौन बनाएँ [बालगीत]



 282/2025

    


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'  



माँजें     दाँत        दतौन      बनाएँ।

मोती  -   सी    दंतियाँ    चमकाएं।।


मुख  पर  अपने   दो    कपाट    हैं।

मुख   के  प्रहरी  शुभ   विराट   हैं।।

बत्तीस    दाँत   वहीं     पर    पाएँ।

माँजें     दाँत        दतौन    बनाएँ।।


काटें      वे       आहार      हमारा।

पाचन   के    हैं    दाँत     सहारा।।

लेती  स्वाद     जीभ    रस   पाएँ।

माँजें      दाँत     दतौन     बनाएँ।।


दाँत    दूध     के    सबके    आते।

ग्यारह    बाद    विदा     हो जाते।।

बदल  रूप    सुदृढ़    फिर  आएँ।

माँजें     दाँत       दतौन    बनाएँ।।


कण भर   जो   दाँतों   में  भरता।

मुखज   गुहा  में  जाकर  सड़ता।।

मुख को अपने   स्वच्छ   सजाएँ।

माँजें   दाँत       दतौन     बनाएँ।।


जब    दुर्गंध    मुखों    से    आए।

निज  समीप  कोई    न   बिठाए।।

कुल्ले    करें      दाँत     महकाएँ।

माँजें     दाँत     दतौन      बनाएँ।।


शुभमस्तु !


26.06.2025●11.15आ०मा०

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