सोमवार, 22 सितंबर 2025

दुर्गा माँ [ चौपाई ]

 576/2025


                


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'

दुर्गा   माँ       के       रूप     सुहाए।

भक्त   दर्श      को      मंदिर     आए।।

प्रथम    शैलपुत्री        हैं       माता।

भक्त 'शुभम्'   निशिदिन    है   ध्याता।।


 ब्रह्मचारिणी      रूप      तुम्हारा।

दुर्गा माँ      अतिशय     है  न्यारा।।

चन्द्रघंटिका     में        माँ   आतीं।

महिषासुर    को    शीघ्र       नशातीं।।


चौथा        रूप    कुष्मांडा  माता।

आदिशक्ति   का      रूप    सुहाता।।

स्मिति     से         ब्रह्मांड     रचाएँ।

सिंहवाहिनी         आयु       बढ़ाएं।।


रूप    पाँचवां    दुर्गा  माँ   का।

कार्तिकेय जननी    बल दाता।।

सिंहवाहिनी      कमल     विराजें।

भक्तिदायिनी     अनुपम    साजें।।


षष्ठ    रूप      कात्यायनि माता।

दुर्गा माँ  - बल   शत्रु    नशाता।।

साहस  का  प्रतीक     माँ    मेरी।

सुख समृद्धि दें    करें    न    देरी।।


कालरात्रि      तमनाशिनि     मेरा।

दुष्ट नाश    कर       भरें      उजेरा।।

रूप    सातवां   दुर्गा  माँ    का।

भक्तों का रक्षक    शुभता       का।।


अष्टम         रूप      महागौरी  का।

तप से रूप    हुआ   काली      का।।

कंदमूल फल खा    पान   वायु  का।

गंगाजल    से       मिली    दिव्यता।।


सिद्धिदात्रिका     रूप     नवाँ है।

दुर्गा माँ    नित      पद्मासना  हैं।।

शक्ति    अलौकिक    देने    वाली।

सिद्धिदायिनी      मातु    निराली।।


शुभमस्तु !


22.09.2025●10.15 आ०मा०

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