गुरुवार, 18 सितंबर 2025

कैसे क्या बात करें! [ नवगीत ]

 567/2025


     

©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


नियम -नियंताओं की 

कैसे क्या बात करें !


डर लगता है

अँगुली उधर

उठाने में

भला इसीमें

देखें चुप

रह जाने में

बात चलाएँ

नहीं 

न कोई घात करें।


नियम दूसरों की

ख़ातिर 

ही बनते हैं

नहीं स्वयं पर

चलते

या न उभरते हैं

कह दें

नीम बबूल

दिवस को रात करें।


चोर - चोर

मौसेरे भाई होते हैं

खाते-पीते 

अलग-अलग

वे सोते हैं

हाँ जी 

हाँ जी कहें

 न उनको लात करें।


शुभमस्तु !


18.09.2025●3.45 प०मा०

                   ●●●

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

किनारे पर खड़ा दरख़्त

मेरे सामने नदी बह रही है, बहते -बहते कुछ कह रही है, कभी कलकल कभी हलचल कभी समतल प्रवाह , कभी सूखी हुई आह, नदी में चल रह...