567/2025
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
नियम -नियंताओं की
कैसे क्या बात करें !
डर लगता है
अँगुली उधर
उठाने में
भला इसीमें
देखें चुप
रह जाने में
बात चलाएँ
नहीं
न कोई घात करें।
नियम दूसरों की
ख़ातिर
ही बनते हैं
नहीं स्वयं पर
चलते
या न उभरते हैं
कह दें
नीम बबूल
दिवस को रात करें।
चोर - चोर
मौसेरे भाई होते हैं
खाते-पीते
अलग-अलग
वे सोते हैं
हाँ जी
हाँ जी कहें
न उनको लात करें।
शुभमस्तु !
18.09.2025●3.45 प०मा०
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