हिंदी के कुछ चर्चित पन्ने
563/2025
दिव्य लोक की वासिनि हो तुम
विनत भाव में रमती हरदम
सम्मोहन में बाँध लिया है
हमने यह स्वीकार किया है
रमा या कि सरस्वती सु नाम
तापसी रूपसि तुम्हें प्रणाम।
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
शुभमस्तु !
17.09.2025 ●10.45 आ०मा०
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मेरे सामने नदी बह रही है, बहते -बहते कुछ कह रही है, कभी कलकल कभी हलचल कभी समतल प्रवाह , कभी सूखी हुई आह, नदी में चल रह...
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