गुरुवार, 18 सितंबर 2025

तापसी रूपसि तुम्हें प्रणाम

 563/2025


 


दिव्य लोक की  वासिनि हो तुम

विनत भाव  में   रमती   हरदम

सम्मोहन  में   बाँध    लिया   है

हमने यह   स्वीकार   किया   है

रमा या कि   सरस्वती  सु नाम

तापसी   रूपसि   तुम्हें प्रणाम।


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


शुभमस्तु !


17.09.2025 ●10.45 आ०मा०

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