559/2025
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
प्राची में पूनम का
उग आया सोम।
अस्त हुए
अस्ताचल में
दिनकर हैं मौन
शांत हुआ
कलरव भी
सोया है पौन
प्राची से
पश्चिम तक
श्याम हुआ व्योम।
सरिता के
जल तल पर
कलकल है मंद
मानो कवि
कहता हो
चौपाई छंद
जाग उठा
सन्नाटा
स्पंदित हर रोम।
आओ चलें
लहरों का
देखें हम खेल
चन्द्र बिंब
चला रहा
क्रीड़ा की रेल
प्राणों में
हुआ 'शुभम्'
अनुलोम विलोम।
शुभमस्तु !
16.09.2025●5.15 आ०मा०
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