गुरुवार, 25 सितंबर 2025

मानहानि कैसे क्यों होगी! [ नवगीत ]

 581/2025




©शब्दकार

डॉ. भगवत स्वरूप 'शुभम्'


शून्य हो गया

मान जनों का

मानहानि कैसे क्यों होगी !


गाली दो

आरोप लगाओ

चोर कहो या कुछ भी बोलो

अब होगा

अपराध नहीं वह

अपनी वाणी में विष घोलो

पीना 

नहीं जरूरी कोई

कहलाए क्यों व्यसनी रोगी?


परमहंसता

आई है अब

करो याचिका खारिज़ होगी

खोटी खरी 

खूब अब बोलो

नहीं   कहेगा   कोई  ढोंगी

न्यायालय के 

अतल कूप से

खाली ही लौटेगी बोगी।


लिए टोकरी

मानहानि की

लिए घूमते थे अभिजाती

शरद काल की

ओस हो गई

रही नहीं तिनका भर ताती

एक पांत में 

खड़े कर दिए

जज अधिकारी कंजर योगी।


शुभमस्तु !


24.09.2025●11.45 आ०मा

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