गुरुवार, 18 सितंबर 2025

नियम -नियंता बनाम नियम-हंता [ अतुकांतिका ]

 566/2025


     

©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


नियम-नियंता की

बात ही कुछ और है,

क्या आपने किया कभी

इस बात पर गौर है?

दूसरों के लिए

वह कुछ भी  नियम बनाए,

अपने पैने अंकुश से

पीलवान हाथी को चलाए!

जहाँ चाहे खड़ा करे

जहाँ चाहे बिठाए!

पर जब अपनी बारी आए

तो नियम भूल जाए!

वही नियम- नियंता

नियम हंता बन जाए!


यह लोकतंत्र है

यहाँ लाठी ही 

वशीकरण मंत्र है!

जिसके हाथ में 

मजबूत लाठी है,

भैंस उसी की

कहलाती है।

हम और आप 

उसी लोकतंत्र की 

भैंस हैं,

जहाँ -जहाँ 

वह चरायेगा

वहाँ- वहाँ भैंस क्या

यम का भैंसा भी

चर  जायेगा।


यहाँ चोर-चोर 

मौसेरे भाई होते हैं,

जो मरघट में

लाशें बोते हैं,

उन्हें उसी फ़सल का 

इंतजार है,

लठाधारियों को 

कुर्सी का बुखार है।


शुभमस्तु !


18.09.2025● 2.00 प०मा०

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