गुरुवार, 25 सितंबर 2025

पोथियों में धूल जमी [ नवगीत ]

 579/2025


  

©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


पोथियों में 

धूल जमीं

ऑन लाइन ज्ञान है।


चूरन और

चटनी में

पोथियाँ  रो रहीं

पुड़ियों  में

भेलपूरी

अँखियाँ भिगो रहीं

लेपटॉप 

मोबाइल

वही ज्ञान-दान है।


भूल गए वर्ण ज्ञान

गिनती न

पहाड़े याद

नाप तौल

कौन पढ़े

गूगल से फरियाद

कंप्यूटर

बाप बना

सत्य अनुमान  है।


नोट्स हैं न

नोटबुक

लेखन विदा हुआ

डिजीटल हैं

बैंक मनी

खोद दिया है कुँआ

एंड्रॉइड 

तकनीकी

आदमी की बान है।


शुभमस्तु !


24.09.2025●10.45आ०मा०

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