गुरुवार, 25 सितंबर 2025

सम्मान बे ईमान हो गया! [ अतुकांतिका ]

 582/2025




©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


सम्मान 

बे ईमान

हो गया  है अब,

गधे घोड़े ऊँट खच्चर

श्वान बकरी भेड़ मच्छर

सब एक ही

पांत में खड़े हैं,

कोई किसी से 

छोटा नहीं

नहीं कोई

किसी से बड़े हैं !


निर्द्वंद होकर 

बीच चौराहे पर

किसी को गाली दो

अपशब्द भी कहो,

कोई चिंता की बात नहीं

बेफ़िक्र रहो,

अब कोई

मान हानि का 

मुकदमा नहीं कर पाएगा,

कर भी देगा तो

न्यायालय से

खाली हाथ लौटेगा

मुँह की खाएगा!


याचिकाएँ

स्वीकार ही नहीं होंगीं,

खाली ही लौटेगी

अतल कूप से बोगी,

अब न कोई मंत्री है

न विधायक या सांसद

न अधिकारी न नेता

चेयरमैन या सभासद

गाय और शेर

एक ही घाट पर

पानी पियेंगे,

गीदड़ और सिंह

एक समान जिएँगे।


सही अर्थों में

अब समानता आई है,

जब न्यायविदों की

यह न्याय की बात 

रँग लाई है,

किसी को प्रत्यक्षत:

गालियाँ देने की

छूट है,

अब कविसम्मेलन से

हट गया शब्द हूट  है,

टमाटर अंडे ही नहीं

जूते चप्पलें फेंकने की भी

छूट है,

पर ध्यान रखना

एक नहीं

दोनों फेंकने होंगे,

यह तो आप

समझते ही हैं

क्या दोनों पाँव के

नहीं दोगे?


शुभमस्तु !


24.09.2025●12.45प०मा०

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