599/2025
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
माता का
दरबार सजा है
भक्त साधना करते हैं।
आठ भुजाएँ
शोभित माँ की
पुष्प दीप फल अर्पित कर
कन्या एक
खड़ी मंदिर में
हर्षित मुद्रा दृष्टि उधर
अस्त्र -शस्त्र
हाथों में सज्जित
संकट सारे हरते हैं।
सिंहवाहिनी
माता दुर्गा
शुम्भ - निशुम्भ
और महिषासुर
हनन कर रहीं
चंड- मुंड का
लेतीं पल में मातु प्राण हर
दुर्गम असुर
गया है मारा
जो भी अन्य विचरते हैं।
रक्षा करें
मात जगती की
असुरों से भय भारी है
हाथ जोड़ हम
करें प्रार्थना
जनता बहुत दुखारी है
जो आए
ले शरण मात की
सारे भक्त उबरते हैं।
शुभमस्तु !
30.09.2025●3.45 आ०मा०
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