गुरुवार, 28 अगस्त 2025

गलियों की रौनक :कुत्ते [ व्यंग्य ]

 475/2025



©व्यंग्यकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'

वास्तव में कुत्ते भेड़ियों के वंशज हैं। 

दुनिया में सबसे पहले पालतू बनाए गए पशुओं में कुत्तों का प्रथम स्थान है।कुछ भेड़िए ऐसे थे जो कम डरपोक हुआ करते थे। वे इंसानी बस्तियों की ओर उन्मुख हुए और इंसानों के साथ हिल मिल गए और उन्हीं के साथ रहने लगे। ये अपनी प्रारंभिक अवस्था में भेड़िए ही थे ,किंतु उनके प्रति अधिक अनुकूल हो जाने के कारण वे उसके पालतू हो गए। इन्हीं भेड़ियों या कहें पालतू भेड़ियों से कुत्तों का विकास हुआ। जर्मनी में पाए गए एक जीवाश्म में चौदह हजार वर्ष पहले कुत्तों का अस्तित्व मिलता है।

पुरा पाषाण युग के गुफा चित्रों में कुत्तों का चित्रण मिला है,जो पचास हजार साल पहले के हैं। कुत्ते के गुणों में बदलाव लाने के लिए चयनात्मक प्रजनन किया गया ,तब कुत्तों की आधुनिक अनेक नस्लों का विकास संभव हुआ। परिणाम यह हुआ कि आज कुत्तों के अनेक रंग और आकार हैं।उनके स्वभावों में विशेष विविधता है। कुत्ते इंसानों के सबसे वफ़ादार साथियों में से एक माने जाते हैं।

आज कुत्ते गाँव व शहरों की गलियों मोहल्लों सड़कों और बाजारों में पाए जाते हैं। वे यहाँ वहाँ जहाँ तहाँ अपनी रौनक से परिवेश को रंगीन किए हुए हैं। बिना कुत्तों के गली सूनी -सूनी नजर आती हैं। यदि वहाँ  रात अथवा दिन में  कुत्ते भौंकते हुए न मिलें तो वहाँ सन्नाटा पसर जाता है। उनके बिना आदमी भी उदास- उदास दिखाई देता है ।आखिर तो वे उसके आदिकालीन साथी हैं। तो उनके अस्तित्व के बिना वह रह कैसे सकता है !

कुछ संस्कृतियों में कुत्तों को देवी- देवताओं का वाहन भी माना जाता है। हिन्दू धर्म में वे भैरव के वाहन माने जाते हैं। नेपाल देश में तो कुकुर तिहार (त्यौहार) ही मनाया जाता है। यह त्यौहार कुत्तों की पूजा के लिए समर्पित है।जिसमें उन्हें  दही, दूध और अंडों का भोजन कराया जाता है। मान्यता यह है कि कुत्ते यम के संदेश वाहक  हैं  और मृत्यु के बाद वे  अपने स्वामी की रक्षा करते हैं। भारत में कर्नाटक में एक मंदिर भी है ,जिसे नाई देवस्थान के नाम से मान्यता दी गई है।छत्तीसगढ़ के कुकुरदेव के मंदिर में एक स्वामिभक्त कुत्ते की स्मृति में पूजा की जाती है। 

आज कुत्ता सभ्यता और संस्कृति का पर्याप्त विकास हुआ है। परिणाम यह है कि आज कुत्ते केवल गलियों और मोहल्लों की ही रौनक नहीं हैं , वरन अब तो कुत्तों ने बड़े बड़े धनाढ्य सेठों और लालाओं और उनकी ललनाओं को गोद ले रखा है। वे उन्हें खिलाते हैं,उनका मन बहलाते हैं और सुबह शाम उन्हें सड़कों पर टहलाते हैं। आज आदमी कुत्तों का अनुगामी हो गया है,इतने दिन कुत्तों के साथ रहने के बावजूद वह वफ़ादारी का गुण नहीं ला पाया।वह कृतघ्न ही बना रह गया। 'सत्संगति किम न करोति पुंसांम' किन्तु इस आदमी नामक जंतु पर कुत्ते की वफ़ादारी का कोई प्रभाव नहीं पड़ा।

कुत्ते ने अपने विकास के आधुनिक चरण में पर्याप्त प्रगति कर ली है। कहा जाता है कि  लाइका नाम की एक कुतिया 1957 में सोवियत मिशन स्पुतनिक 2 पर जाने वाली पहली जीवित प्राणी का अधिकार पाने में सफल रही।उसने पहली बार अंतरिक्ष की यात्रा की।इस प्रकार कुत्तों का विकास निरन्तर प्रगति की ओर अग्रसर है। वह देश दुनिया और गली सड़कों की रौनक है। दुनिया का  एक देश नीदरलैंड ऐसा भी है कि अब वहाँ कोई आवारा कुत्ता नहीं पाया जाता। एक समय ऐसा भी था जब वहाँ पालतू कुत्तों के कारण रेबीज़ की बीमारी अपने उग्रतम संक्रामक रूप में फैल गई थी ,जिसे मानवीय प्रयासों से नियंत्रित किया गया।

शुभमस्तु !

27.08.2025●11.15प०मा०

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