शुक्रवार, 15 अगस्त 2025

नई स्वतंत्रता! [अतुकांतिका]


432/2025


              


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


सास जमाई ने लुभाई

स्वतंत्र हो गई

युवती मित्र ने उठाई

स्वतंत्र हो गई।


उत्कोच के लिए

स्वतंत्र नेता और अधिकारी

पुलिस और राजस्व में

कम नहीं यह बीमारी

सब स्वतंत्र हैं,

स्वतंत्रता के

यही नए अर्थ हैं।


धनिए में लीद

दूध में पानी

सोने में पीतल

मिलानी ही मिलानी

यही तो है स्वतंत्रता 

की नई कहानी 


बहुएँ बेटे  वृद्ध 

सास ससुर

माँ बाप को

वृद्धाश्रम में

भेजने के लिए

हुए हैं स्वतंत्र,

यही तो है

स्वतंत्रता का

नवल मंत्र!


गबनी गबन के लिए

दमनी दमन के लिए

स्वतंन्त्र ही स्वतंत्र

क्या करेगा लोकतंत्र ?


यहाँ पर कोई

आकर कुछ सोचेगा

या जगत गुरु

यही स्वतंत्रता देखेगा!

वाह रे!

मेरे नए भारत

कर दिया

नई स्वतंत्रता ने गारत !


शुभमस्तु !


14.08.2025●2.30आ० मा०

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