सोमवार, 11 अगस्त 2025

खेल नहीं है नेतागीरी [नवगीत]

 418/2025


    

©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


खेल नहीं है

नेतागीरी

बड़े -बड़े हथकंडे हैं।


रंग बदलने की

क्षमता हो 

तो गिरगिट को बना गुरू

पश्चिम चले

पूर्व बतलाए

बात यहीं से करे शुरू

धेला भर भी

काम न आए

सतराये ले डंडे हैं।


बिना पढ़े ही

जगत गुरू हो

ऐसे करतब वाला हो

बिना लड़े ही

वीर कहाए

भीतर से परनाला  हो

कोयल जैसी

चतुराई हो

सेते कौवे अंडे हैं।


करे और ही

श्रेय लूट ले

ऐसी कारस्तानी हो

बातों के 

रसगुल्ले बाँटे

और न कोई सानी हो

अभिनेताई में

माहिर हो

नेताजी वह पंडे हैं।


शुभमस्तु !


10.08.2025●5.00 प०मा०

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