400/2025
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
आदमी है
आदमी को
आदमियत से काम क्या!
हो भला
मेरा सभी कुछ
सोच है ऐसी बड़ी
भाड़ में
जाएँ सभी जन
छोड़ता है फुलझड़ी
काम अपना
निकल जाए
खैरियत से काम क्या !
नुक्ताचीनी
और खामी
खोजना ही काम है
हाथ में
माला फिराता
जप रहा हरि नाम है
बगल में छुरियाँ
दबाए
असलियत में राम क्या ?
सुअर का है बाल
आँखों में
बिराना देश है
दिल की वफ़ाएँ
मर चुकी हैं
बगबगा तन वेश है
पाप की
गठरी उठाए
भ्रमित चारों धाम क्या !
शुभमस्तु !
05.08.2025●9.00आ०मा०
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[11:07 am, 5/8/2025] DR BHAGWAT SWAROOP:
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