434/2025
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
-1-
गंगा यमुना नित बहें,संग सरस्वति धार।
पावन यह धरती करें,सरसाएँ बहु प्यार।।
सरसाएँ बहु प्यार, हिमाचल रक्षक प्रहरी।
लेता हमें उबार, सभ्यता संस्कृति गहरी।।
'शुभम्' नमन दिन-रात,रहे हर जन-जन चंगा।
भारत देश महान, बहें सुरसरि नित गंगा।।
-2-
आतीं -जातीं देश में, षड ऋतुएँ हर साल।
पावस कभी वसंत है, शरद शिशिर की ताल।।
शरद शिशिर की ताल,ग्रीष्म हेमंत मनोहर।
नर्तित मोर मराल, देश की सरित महीधर।।
'शुभम्' सुखद शुचि प्रात,कली कोमल मुस्कातीं।
भारत देश महान, सभी ऋतु आतीं-जातीं।।
-3-
धरती नदियाँ बेल तरु,गिरि सागर खग ढोर।
जन-जन से अति प्यार है,बरसें घन पुरजोर।।
बरसें घन पुरजोर, करें कलरव सरिताएँ।
पंकज भरे तड़ाग, महकती हैं शुभताएँ।।
'शुभम्' देश की शान, लहर झंडे की भरती।
भारत देश महान, स्वर्ग-सी पावन धरती।।
-4-
आजादी हमको मिली, भाग गए अंग्रेज।
सुख की साँसें ले रहे, सोते सुख की सेज।।
सोते सुख की सेज, सकल ये भारतवासी।
करते स्वेच्छाचार, इसी से हमें उदासी।।
'शुभम्' यही संदेश, यही है नेक मुनादी।
भारत देश महान, बचाएँ हम आजादी।।
-5-
मनमानी करना नहीं, देश भले आजाद।
जिनके तप बलिदान से, हुए करें भी याद।
हुए करें भी याद, फहरता कहे तिरंगा।
लहराता शुभ सिंधु, पावनी बहती गङ्गा।।
'शुभम्' त्याग का पेड़,फला है वही निशानी।
भारत देश महान, करें मत हम मनमानी।।
शुभमस्तु !
14.08.2025●10.45 प०मा०
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