रविवार, 24 अगस्त 2025

माली [ अतुकांतिका ]

 461/2025


                         

©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


बिना माली का बाग

उजड़ जाता है शीघ्र

चाहिए एक माली

जो देखभाल करे।


आवश्यक है

जीवन में ऐसे ही

पारिवारिक 

बाग का माली

जिसकी रोक-बाँध से

सजी रहती हर डाली।


बीहड़ नहीं है

कोई परिवार

जो भगवान भरोसे हो

उसे चाहिए अहर्निश

देखभाल

पनपने के लिए।


रोक-टोक को 

जो बुरा मानेगा

वह अपनी ही ढपली

अलग बजाएगा

इसलिए माली का

कहना मानें,

अपनी नहीं

जबरन तानें।


व्यवस्था प्रबंधन

सर्वत्र अनिवार्य है

बिना इसके नहीं

सफल गृह कार्य है

माली की मानना

करना ही स्वीकार्य है।


शुभमस्तु !


24.08.2025●7.45आ०मा०

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