465/2025
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
स्वयं में व्यस्तता
पतन से बचाए
यदि व्यस्त हो अपनी
प्रगति के लिए,
फिर क्या कहने!
खाली दिमाग़
शैतान का घर होता है
जो व्यस्त खोया है
अपने में
उसे खुराफ़ात के लिए
समय कहाँ होता है।
न रहोगे कभी खाली
न बजाएगा वक्त ताली
कर्म करना ही जीवन है
कर्म ही धर्म यौवन है।
करता है किसी की
बुराइयाँ भी वही
जो होता है
दिमाग से पैदल
कहीं न कहीं।
अपनी व्यस्तता में ही
छिपी है प्रगति भी तेरी
बुरा देखने वालों में
मिलेगी बुराई की ढेरी।
शुभमस्तु !
24.08.2025●8.45 आ०मा०
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