शनिवार, 9 अगस्त 2025

चलो ओढ़ लेते हैं चादर [नवगीत]

 415/2025


       

©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


चलो 

ओढ़ लेते हैं चादर

बेशरमाई की।


बनी सुरक्षित 

रहे हमारी

सबसे ऊपर कुर्सी

शामिल होते

 हम झोपड़ियों में

करने मातमपुर्सी

हमें जरूरत

 हर गरीब की

वोट पुजाई  की।


हमें आम से 

काम नहीं है

करना हमें चुसाई

पाँच साल में

एक बार ही

लेना हमें दवाई

सरणी उसकी

नहीं बराबर

पर्वत खाई की।


पीना होता दूध

पाल लेते हैं

भैसें गायें

चारा भी 

देना होता है

मत भूखी मर जाएँ

वरना हमको

तो आती है

बद उबकाई-सी।


शुभमस्तु !


09.08.2025●10.30आ०मा०

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