सोमवार, 18 अगस्त 2025

कृष्ण कन्हैया [ चौपाई ]


441/2025


               

©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


कृष्ण    कन्हैया     वेणु     बजैया।

नंद यशोमति    की   छवि    छैया।।

जन्म अष्टमी  का     दिन   आया।

घर-घर   में    शुभ  पर्व   मनाया।।


राधा   के   प्रिय    कृष्ण   कन्हैया।

रँभा   रही     है    कजरी     गैया।

कब  वन  में    तुम   ले   जाओगे।

माँ       यशुदा    को     हर्षाओगे।।


माखन   की   तुम   करते   चोरी।

फिर  भी   करें     प्रतीक्षा   गोरी।।

डाँट   लगा     देती    है     मैया।

नटखट  प्यारे   कृष्ण    कन्हैया।।


सखा    मनसुखा  और  सुदामा।

याद करें   गोपी    ब्रज    वामा।।

भगिनि    सुभद्रा   के  प्रिय भैया।

फिर-फिर आओ  कृष्ण कन्हैया।।


लीलाधारी       दानव        हंता।

करते      मानव    सेवा    संता।।

पार     लगाते    हैं     प्रभु   नैया।

हुए  धन्य  हम   कृष्ण    कन्हैया।।


ले  अवतार    धन्य   माँ   कीन्ही।

मातु    देवकी   कृपा    अचीन्ही।

बलदाऊ      के      छोटे    भैया।

वासुदेव   प्रभु   कृष्ण   कन्हैया।।


'शुभम्'  भूमि  ब्रज की  जन्माया।

कृपा   तुम्हारी     ममता    छाया।।

लेतीं     माता     नित्य     बलैया।

कृपा करो    हे कृष्ण     कन्हैया।।


शुभमस्तु !


18.08.2025●2.00प०मा०

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