बुधवार, 13 अगस्त 2025

मद में रहते चूर [ नवगीत ]

 431/2025


            

©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


गुरुता के 

जो पात्र नहीं हैं

मद में रहते चूर।


वाह ! वाह !!

इनको भाती है

बस अपनी ही वाह

देख अन्य को

निकले मुख  से

भरी वेदना आह

कहें सभी गुरु 

आप जुपीटर

सही सबल मगरूर।


बात 

इशारों में करते हैं

समझ सको संकेत

क्यों कैसे का

प्रश्न नहीं है

कुशल समीक्षा प्रेत

हाथ मिलाते 

नहीं किसी से

सबसे रहते दूर।


कहलाते हैं

आज वही सब

बड़े समीक्षक देव

अगर सीखना है

कुछ इनसे

करो चरण की सेव

नहीं इन्होंने

गर चाहा तो 

हो जाओ मजबूर।


शुभमस्तु !


13.08.2025●11.15 आ०मा०

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