शुक्रवार, 22 अगस्त 2025

सब एक हो जाओ [अतुकांतिका]



452/2025


     

© शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'

       


जब पढ़ना था

तब पढ़ा नहीं,

जब शिखर पर 

चढ़ना था

तब चढ़ा नहीं,

अब छलाँग लगाकर

मंजिल हथियाने की

योजना है ,

 इसके लिए भी 

भला क्या सोचना है?


जब कुछ भी न कर सको

नेता के लबादे में जा घुसो

जहाँ न जाने की हो अनुमति

गेटकीपर को मारो दो धक्का

और जबरन ही जा ठुसो !


कौन  पूछता है 

पढ़ाई -लिखाई

कोरी हेकड़ी ही

सब जगह काम आई!

टेढ़ी करो अंगुलियाँ अपनी

चमकाओ जूते के बल

अपनी ठकुराई।


नेता जी को 

आई ए एस सलाम बजाता है

उसे देखते ही

कुर्सी छोड़ खड़ा हो जाता है

यहाँ  हर तरह की गुंडई का 

फार्मूला काम आता है।


बिना पढ़े- लिखों से

हर नेता चुना जाता है,

पढा- लिखा तो मशीन है

वोट डलवाता है,

बताइए पढ़ाई- लिखाई का गुण

किस काम आता है?


जितनी बार चुने जाओ

हर बार नई पेंशन पाओ

जब स्वयं संसद में बैठ जाओ

तो  नौकरीपेशाओं की

पेंशन को बंद करवाओ,

अपना वेतन बढ़वाने के लिए

गिद्ध कौवे चील और

 गीदड़ एक हो जाओ।


यही लोकतंत्र की

परिभाषा है,

यहाँ कोई हंस नहीं

मानव हंताओं का

मेला है तमाशा है,

जो जितना लूट सके

लूट लो,

इधर रहो या उधर

कभी तुम्हारी तो

कल हमारी है,

यह कुर्सी

 खाली तो नहीं रहनी,

यह तो बेचारी है !


शुभमस्तु !


22.08.2025● 9.30 आ०मा०

                 ●●●

[2:43 pm, 22/8/2025] DR  BHAGWAT SWAROOP: 

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