सोमवार, 11 अगस्त 2025

नेता के सँग पोज बनाकर [नवगीत]

 417/2025




©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


नेता  के सँग 

पोज बनाकर

देखो कैसे बैठे हैं।


पड़ी मिली हो

बड़ी सम्पदा

जैसे किसी घूर के ढेर

कॉलर तान

सजे वे  बैठे

मानो बैठा कोई शेर

मित्रों पर वे

रौब दिखाते

गुर्गा बन कर ऐंठे हैं।


नेता को

भगवान समझते

ठगवाते कटवाते हैं

तेल लगाते 

मालिश करते

घुइयाँ भी छिलवाते हैं

नेता जी के

सभा कक्ष में

मसनद में वे पैठे  हैं।


नेता के सँग 

आना -जाना

बड़े गर्व की बात लगे

कभी वक्त पर

काम न आएँ

नेता होते नहीं सगे

कुछ तो कहते

खास हमारे 

भ्राता हैं कुछ जेठे हैं।


शुभमस्तु !


10.08.2025 ●4.45प०मा०

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