424/2025
© शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
पश्चिम गगन
डूबता सूरज
दृश्य मनोहर भारी।
वर्षा बीत चुकी
नभ पीला
लाल घटाएँ काली
छाया सघन
धुँधलका भू पर
आच्छादित हरियाली
इंद्रधनुष के अर्द्ध वृत्त में
अलग ओप उजियारी।
दूर - दूर तक
सरिता का जल
इंद्रधनुष में खोया
उधर शांत हैं
लहरें कलकल
लगता है जल सोया
देख तृप्त
होती हैं आँखें
सुषमा है अति प्यारी।
जो चढ़ता है
नभ में ऊपर
नीचे भी वह जाता
इसीलिए हे
मानव मूरख
क्यों इतना इतराता
सत्कर्मी के साथ
इंद्र का धनुष
करे चमकारी।
शुभमस्तु !
12.08.2025●6.00आ०मा०
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