शनिवार, 9 अगस्त 2025

ख़बरदार [ नवगीत]

 413/2025


      


©शब्दकार

डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'


नारी  हूँ

नारी होना  हथियार

ख़बरदार !


मैं   कभी  गलत   नहीं

झूठ   एक  शब्द  नहीं

जमाना मेरा है

जो करूँ  सब  सही

दिमाग का करूँ दही

घाटा सब तेरा है

दूर   रह   मुझसे तू

डरता रह मुझसे तू 

पड़ेगी नहीं पार

ख़बरदार !


बड़े - बड़े बह गए

संत जन कह  गए

मुझसे मत टकराना

बनाती हूँ कहानी मैं

बोल   जाएगा तू  पें

इतना मत इतराना

खुले मेरे सब द्वार

खा गई जो तुच्छ खार

ठन जाएगी तकरार

ख़बरदार!


 हाथ   में  नकेल  है

होनी तुझे   जेल  है 

वकील न्यायाधीश मैं

रहेगा  जो  अधीन  तू

बंद रखे   अपना   मूँ

भेड़   बन   करे    भें 

देखने  में सुप्त  आग

जाग जाए फनी  नाग

जला करे क्षार- क्षार 

ख़बरदार!


शुभमस्तु!


08.08.2025●12.00मध्याह्न

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