469/2025
समांत : अण
पदांत : अपदांत
मात्राभार : 16.
मात्रा पतन : शून्य।
©शब्दकार
डॉ.भगवत स्वरूप 'शुभम्'
दिखते नहीं शुभद अब लक्षण।
नैतिकता का लगा हुआ पण।।
हिंसक हुए देश दुनिया के।।
एक नहीं अनगिनती रावण।।
धन अर्जन की होड़ लगी है।
नहीं शेष है अब आकर्षण।।
ट्रम्प समझता शहंशाह मैं।
मैं पहाड़ भारत है लघु तृण।।
कौन बचाए किसको कितना।
परेशान है जग का जनगण।।
देखें जिधर उधर ही ज्वाला।
दहक उठा है मन का कण-कण।।
'शुभम्' श्याम आओ अवनी पर।
आवश्यक है कृष्ण - अवतरण।।
शुभमस्तु !
25.08.2025●3.00आ०मा०
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